
यूँ ही लम्हे गुजरते रहते हैं
एक यार के इंतजार में
ये लम्हे ही दिन और साल बन जाते हैं।
बस इंतजार में जो कभी हाथ नही आता है।
चित्रों की भाषा में हम बहुत कुछ कह संके है। अपनी पुराणी यादों को तारो तजा कर सकते हैं ।